हरियाणा सिविल सेवा (HCS) परीक्षा के पैटर्न में एक बड़े बदलाव की खबर ने सभी उम्मीदवारों का ध्यान खींचा है। वैकल्पिक विषय का हटना निश्चित रूप से सबसे बड़ी सुर्खी है, लेकिन इस बड़े बदलाव के शोर में कुछ और महत्वपूर्ण, आश्चर्यजनक और अक्सर अनदेखे किए गए नियम भी हैं जो किसी भी उम्मीदवार की सफलता या असफलता का कारण बन सकते हैं।
यह लेख केवल वैकल्पिक विषय हटने की बात नहीं करेगा, बल्कि उन पांच सबसे प्रभावशाली बदलावों पर से पर्दा उठाएगा जिन्हें हर गंभीर HCS उम्मीदवार को न केवल जानना, बल्कि अपनी तैयारी की रणनीति में शामिल करना भी ज़रूरी है। आइए इन नए नियमों को विस्तार से समझते हैं।

1. वैकल्पिक विषय खत्म: अब खेल सबके लिए बराबर है
सबसे बड़ा और स्पष्ट बदलाव यह है कि HCS मेन्स परीक्षा से 200 अंकों के वैकल्पिक पेपर को पूरी तरह से हटा दिया गया है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि यह सभी उम्मीदवारों के लिए एक “समान अवसर का मैदान” (Level Playing Field) तैयार करता है। इस बदलाव से विज्ञान और मानविकी विषयों के बीच स्कोरिंग में आने वाले अंतर और स्केलिंग/नॉर्मलाइजेशन से जुड़े विवाद कम होंगे।
इस रणनीतिक बदलाव का सीधा मतलब है कि अब तैयारी का पूरा ध्यान सामान्य अध्ययन (GS) पर केंद्रित हो गया है। यह बदलाव उन उम्मीदवारों को पुरस्कृत करेगा जो मजबूत अंतःविषय सोच (interdisciplinary thinking) रखते हैं, क्योंकि अब उन्हें विभिन्न GS पेपरों के बीच संबंध स्थापित करने की आवश्यकता होगी – जैसे कि GS-III की आर्थिक नीतियों को GS-II के सामाजिक न्याय से जोड़ना।
2. प्रीलिम्स का रहस्यमयी ‘पांचवां विकल्प’
HCS प्रीलिम्स परीक्षा में एक अनूठा और चौंकाने वाला नियम है जिसके बारे में हर उम्मीदवार को पता होना चाहिए। यहां प्रत्येक प्रश्न के लिए पांच विकल्प (A, B, C, D, और E) दिए जाते हैं। यह सिर्फ एक अतिरिक्त विकल्प नहीं है, बल्कि इसके गंभीर परिणाम हैं।
• यदि आप किसी प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं, तो आपको A, B, C, या D में से किसी एक गोले को काला करना होगा।
• यदि आप किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दे रहे हैं, तो आपको ‘E’ गोले को अनिवार्य रूप से काला करना होगा।
• यदि आप किसी प्रश्न के लिए सभी पांचों गोले खाली छोड़ देते हैं, तो एक-चौथाई (0.25) अंक काट लिया जाएगा।
• यदि कोई उम्मीदवार 10% से अधिक प्रश्नों में किसी भी गोले को नहीं भरता है, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
यह सिर्फ नेगेटिव मार्किंग का नियम नहीं, बल्कि आपकी उम्मीदवारी बचाने की एक अनिवार्य शर्त है। एक छोटी सी प्रक्रियात्मक चूक आपको प्रतियोगिता से पूरी तरह बाहर कर सकती है।
3. मेन्स अब एक नई मैराथन है: ज़्यादा पेपर, ज़्यादा लेखन
नए पैटर्न के तहत, मेन्स परीक्षा का विस्तार चार पेपर से बढ़ाकर छह पेपरों तक कर दिया गया है। अब आपको निम्नलिखित छह पेपर देने होंगे:
• अंग्रेजी (निबंध सहित)
• हिंदी (निबंध सहित)
• सामान्य अध्ययन-I
• सामान्य अध्ययन-II
• सामान्य अध्ययन-III
• सामान्य अध्ययन-IV
इन छह पेपरों के कुल 600 अंक और इंटरव्यू के 75 अंक मिलाकर ही 675 अंकों की अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जो आपके चयन का आधार बनेगी।
इस बदलाव का सीधा परिणाम यह है कि उम्मीदवारों को अब बहुत अधिक लिखने की आवश्यकता होगी। सफलता के लिए अब उत्तर-लेखन का निरंतर अभ्यास और परीक्षा के दौरान मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति बनाए रखना पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। यह नया GS-भारी ढाँचा HCS परीक्षा को UPSC पैटर्न के और भी करीब लाता है, जिससे दोनों परीक्षाओं की एक साथ तैयारी करने वाले गंभीर उम्मीदवारों के लिए यह अधिक कुशल हो गया है। विशेष रूप से, GS-IV (नीतिशास्त्र) जैसे पेपर का जुड़ना यह स्पष्ट संकेत देता है कि आयोग अब केवल तथ्यात्मक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की नैतिक और प्रशासनिक योग्यता का भी आकलन करना चाहता है, जो पूरी तरह से UPSC की सोच के अनुरूप है।
4. भाषा के पेपर हैं आपके द्वारपाल: इन्हें हल्के में न लें
मेन्स परीक्षा में सफल होकर इंटरव्यू के लिए चुने जाने के लिए अब दोहरी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। इन शर्तों को समझना बेहद ज़रूरी है:
• शर्त 1: उम्मीदवार को सभी लिखित मेन्स पेपरों के कुल अंकों में से कम से कम 45% अंक प्राप्त करने होंगे।
• शर्त 2: उम्मीदवार को हिंदी और अंग्रेजी दोनों पेपरों में अलग-अलग न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करने होंगे।
ये भाषा के पेपर सचमुच आपके द्वारपाल हैं। सामान्य अध्ययन में असाधारण अंक लाने के बाद भी, यदि आप इन दोनों में से किसी एक द्वार को भी 33% अंकों के साथ पार नहीं कर पाते, तो आपके लिए इंटरव्यू का मुख्य द्वार कभी नहीं खुलेगा।
5. DSP बनने का सपना? पहले अपनी उम्र और कद जांच लें
हरियाणा सिविल सेवा में पुलिस उपाधीक्षक (Deputy Superintendent of Police – DSP) का पद एक प्रतिष्ठित विकल्प है, लेकिन इसके लिए कुछ विशेष और सख्त मानदंड हैं जिन्हें उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले जांच लेना चाहिए।
• अधिकतम आयु: अन्य पदों के लिए 42 वर्ष के विपरीत, DSP के लिए अधिकतम आयु 27 वर्ष है।
• आयु में छूट: 5 साल की छूट केवल SC, ST, BC और EWS श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध है (अर्थात, अधिकतम आयु 32 वर्ष)।
• शारीरिक मानक (पुरुष): ऊंचाई 5’7” (170.18 सेमी), छाती 33” (बिना फुलाए) और 34.5” (फुलाकर)।
• शारीरिक मानक (महिला): ऊंचाई 5’2” (157.50 सेमी)।
कई उम्मीदवार सभी पदों के लिए एक समान ऊपरी आयु सीमा मानकर तैयारी करते हैं और अंत में DSP पद की वरीयता भरने से चूक जाते हैं। यह एक आम गलती है जिससे बचना चाहिए। आवेदन करने से पहले ही इन विशिष्ट मानदंडों की जांच करना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
निष्कर्ष
HCS परीक्षा का नया पैटर्न केवल सतही बदलाव नहीं है; यह एक रणनीतिक विकास है जो विशेषज्ञता के बजाय व्यापक ज्ञान, रटने की क्षमता के बजाय लेखन कौशल और प्रक्रियात्मक जागरूकता को प्राथमिकता देता है। केवल वैकल्पिक विषय के हटने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, इन सभी पांच महत्वपूर्ण बदलावों को समझना और अपनी रणनीति को उसके अनुसार ढालना सफलता की कुंजी है।
इन बदलावों के साथ, HCS अब UPSC के और भी करीब आ गया है। इस नए युग में सफल होने के लिए आपकी तैयारी की रणनीति कितनी व्यापक और सटीक है?
📌 नया पैटर्न समझना ही नहीं, उसे सही तरीके से लागू करना ही सफलता है।
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